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विद्रूपताओं का आईना

आज़ाद

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जान रहा हूँ

हक़ीक़त है क्या फ़सानामैं सब जान रहा हूँसाधो जग का यूँ बौरानामैं सब जान रहा हूँ। सैफ़ ज़ुबाँ से बरगलानामालूम…

प्रयोग!

एक बूढ़ा सनकी वैज्ञानिक अपनी गोपनीय और बेतरतीब सी प्रयोगशाला में दोनों हाथ कमर पर रखे चहलकदमी कर रहा है।…

अनूठी क्रांति!

कौन कहता है इंसान कोलट्टू की तरह नचाया नहीं जा सकताखुद नाचना चाहो तोनाच सकते होबेशक नाचोनफ़रत की बीन परलेकिनराम…