• Tue. Jun 25th, 2024

सटायर हिन्दी

विद्रूपताओं का आईना

सेवा में
.
.
श्रीमान
.
.
किसने कहा था
.
.
जिसकी लाठी उसकी भैंस
.
.
ये मुहावरा किसने दिया था?
.
.
किसी भी चाणक्य ने तो नहीं दिया
.
.
तो फिर किसने दिया?
.
.
उसे साकार किसने किया?
.
.
एंटायर पॉली ‘ट्रिक्स’ का असली जानकार तो वही है
.
.
‘खुल जा सिमसिम’ की तरह ये मुहावरा भ्रम की गुफ़ा खोलने का मंत्र है
.
.
इस गुफ़ा को बंद करने का मंत्र भी ज़रूर होगा
.
.
चलो सब मिल कर ढूँढें
.
.
ढाई आखर प्रेम का
.
.
शायद बात बन जाए
.
.
ना ना आप की बात हम समझ गये
.
.
अभी सही से कहाँ बिगड़ी है
.
.
यही कहना चाहते हैं न आप
.
.
दिल से और ईमानदारी से बोलना
.
.
आपके या आने वाली पीढ़ी के अच्छे दिन आ गये ना
.
.
तो बस मस्त रहिये
.
.
अकेले अपने भ्रम के गोले में खुश रहिये
.
.
बस दुआ.. नहीं..नहीं.. प्रार्थना कीजिये कि वो फूटे नहीं
.
.
क्योंकि इस गुब्बारे को आपने ही नफ़रत की गर्म हवा भर भर के इस ऊँचाई तक पहुँचाया है
.
.
हम आपके आज के दुश्मन आपको हर वक़्त प्रेम की चादर फैलाये नीचे आपको बचाने के लिये
.
.
तैयार मिलेंगे
.
.
क्योंकि हम उस वक़्त भी आपको देशद्रोही नहीं कहेंगे
.
.
देख लेना एक दिन ये आप खुद को कहेंगे या फिर आपका इतिहास
.
.
इतिहास को निर्मम होना चाहिए
.
.
ये कहने और करने वाले भी एक दिन उसी कलम के फरसे की धार से काटे जाएंगे
.
.
जिस धार से आप अपने भविष्य को काट रहे हैं
.
.
उफ़
.
.
अब सीने में सिर्फ़ हिंदुत्व बचा है ना
.
.
और कोई भावना नहीं
.
.
तो क्यों ना आज रात हिंदुत्व की मणि को मस्तक पर लगा कर
.
.
जला दी जाएं सच के सपूतों की ज़िंदा चिताएं
.
.
और फिर अभिशप्त हो जाएं
.
.
हर युग में मणि विहीन भटकने के लिये
.
.
लेकिन मेरा सवाल अभी बाक़ी है
.
.
उसने आडवाणी-जोशी को मार्गदर्शक मंडल में क्यों डाला?
.
.
विनीत
.
.
एक देशभक्त

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *