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सटायर हिन्दी

विद्रूपताओं का आईना

आयेगा तो… !

Byआज़ाद

May 13, 2021

यमलोक के अपने विशाल महल में यमराज गुस्से से चहलकदमी कर रहे हैं। कई सालों से पृथ्वी लोक के एक विशेष भू भाग से लगातार आ रही ये आवाज़ कि ‘आयेगा तो… आयेगा तो..’ सुन कर यमराज के कान पक चुके हैं।

चित्रगुप्त इस तरह उनकी उद्विग्नता को बढ़ते देख बहुत चिंतित हैं। उन्होंने सहमते हुए पूछा, ‘हे धर्मराज! आप इस शोरगुल से इतने व्याकुल क्यों हैं?’

यमराज ने कोरोना काल में बढ़ आयी अपनी दाढ़ी को नोंचते हुए कहा, ‘चित्रगुप्त! क्या कहूँ? सुन नहीं रहे हो ये शोरगुल। मुझे लगता है कि धरती पर धर्म का नाश हो रहा है। मानवों ने मेरी जगह किसी और की शरण ले ली है।’

चित्रगुप्त – ‘मैं समझा नहीं, आपको ये आभास क्योंकर हुआ?’

यमराज – ‘तुम तो जानते हो चित्रगुप्त। समस्त प्राणी मात्र के लिये मृत्यु ही सबसे बड़ा सत्य है। जो भी नश्वर संसार में गया है एक न एक दिन उसकी मृत्यु निश्चित है।’

चित्रगुप्त – ‘जी बिल्कुल। लेकिन इस बात का मृत्युलोक से आ रही ‘आयेगा तो.., आयेगा तो..’ जैसी आवाज़ों से क्या संबंध?’

यमराज ने अपनी लाल लाल आँखें चित्रगुप्त पर टिकाते हुए कहा – ‘लेकिन ये लोग तो मृत्यु से भी ज़्यादा किसी और के आने की भविष्यवाणी पूरे आत्मविश्वास के साथ कर रहे हैं। तुम तो जानते हो कि जैसे मौत परम सत्य है उसी तरह प्राण लेने के लिये मेरा आना तय है लेकिन ये तो मुझे छोड़ कर सालों से किसी और का ही नाम रट रहे हैं।’

चित्रगुप्त – ‘अरे अरे, अब समझा मैं आपकी व्याकुलता का कारण। आपको लगता है कि इन लोगों ने आपकी जगह किसी लोकल ब्रांड मौत के सौदागर को अपना भगवान मान लिया है।’

यमराज – ‘लगता नहीं है, मुझे पूरा यक़ीन है कि यही हो रहा है।’

चित्रगुप्त अपनी दूरदृष्टि से धरती का हाल लेते हैं और उनके ललाट पर सोमरस की बूँदें चमकने लगती हैं। प्राणिमात्र का लेखाजोखा संभालने वाले चित्रगुप्त सबसे पहले अपने कागज़ देख कर आश्वस्त होते हैं। फिर यमराज को वस्तुस्थिति समझाते हैं।

‘क्षमा करें भगवन, आपको शायद याद नहीं कि कुछ साल पहले मृत्युलोक के गुजरात क्षेत्र से एक चतुर बनिया सशरीर आपके पास आया था। उसने कई साल पहले के अपने क्षेत्र के कुछ मौत के आंकड़े दिखा कर आपसे धरती पर आपके प्रतिनिधि के तौर पर काम करने की अनुमति माँगी थी।’

यमराज – ‘मुझे कुछ कुछ याद आ रहा है, तुम पूरी बात विस्तार से कहो।’

चित्रगुप्त – ‘तब तो आपने उसे दुत्कार कर भगा दिया था। लेकिन वो इतना चालाक निकला कि जाते जाते ज़िंदा होने का प्रमाण पत्र लेने के बहाने आपसे कोरे कागज़ों में दस्तख़त करा कर ले गया। लगता है वही कागज़ दिखा कर उसने धरती पर आपके नाम से सत्ता हथिया ली है। मुझे याद है कि जाते जाते वो अपने साथ यमलोक से एक भैंसा और यममहल प्रोजेक्ट का प्रस्तावित नक्शा भी ले भागा था।’

यमराज – ‘तभी मैं कहूँ कि मेरे बिना जाये धरती से इतनी बड़ी तादाद में मनुष्य बिना टिकट यमलोक क्यों पहुँच रहे हैं। लगता है इन लोगों ने मुझसे भी अधिक 18-18 घंटा काम करने वाला मौत का देवता चुन लिया है। लेकिन क्या ये मेरी सत्ता को चुनौती नहीं?’

चित्रगुप्त – ‘हे सूर्यपुत्र! आप साक्षात मृत्यु हो और वो देवता के भेष में एक बहुरूपिया। कुछ मूर्ख लोग भले ही उसके आने को शाश्वत सत्य मान बैठे हों लेकिन आपके तेज़ के आगे ऐसे तुच्छ अहंकारी की क्या बिसात। कोरोनाकाल में वैसे भी बाहर जाना मना है इसलिए आप निश्चिंत हो कर आराम करें और जाहिल भक्तों को उनके हाल पर छोड़ दें। एक दिन यही मनुष्य जीने की छटपटाहट में खुद मुट्ठी तान कर उसके सामने जा खड़े होंगे। फ़रेबी यमदूत को भैंसा समेत कूटा जाएगा और लोग मौत के पीछे नहीं ज़िंदगी के पीछे भागेंगे।

यमराज ने दोनों हाथ उठाकर कहा, आमीन।

 

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