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सटायर हिन्दी

विद्रूपताओं का आईना

क्या हुआ?
साहब एक लड़की मर गयी
तो क्या हुआ बे..
रोज़ मरती हैं!
साहब मरी इसलिये..
क्योंकि..
मारी गयी
किसकी?
गाय नहीं थी साहब..
ये पूछिये..
कैसे?
हाँ तो दोनों बता बे
साहब इज़्ज़त लूट ली उसकी
अबे इज़्ज़त विज़्ज़त क्या होती है
क्या तेरी है? क्या मेरी है?
तू ये बता जो पूछा है!
पाँच डब्ल्यू और एक एच क्या है?
पत्रकारिता जानता नहीं क्या?
तेरे घर में टीवी कब आया?
साहब आठ साल पहले
वोई तो..
फ़िर तू कैसे जानेगा पत्रकारिता!
साहब मुद्दे पर आऊँ?
अबे जब जनता ही नहीं आ रही..
तो तुझे क्या पड़ी है!
साहब
अब आप नेता की तरह बोल रहे हो!
अबे और कोई गाली नहीं मिली?
माँ बहनों को ही एक कर देता
इस बहाने..
खैर बता आरोपी कौन है?
एक सांसद हैं
राष्ट्रवादी तो नहीं हैं?
वही हैं, आपको कैसे पता?
बेटा तू जिस विभाग में पढ़ रहा है..
उसका टॉपर रहा हूँ मैं..
पूरे गाँव में जलसा हुआ था मेरा
लेकिन उससे बलात्कार का क्या संबंध?
बेटा उसके बाद बलात्कार बढ़ गये थे..
गाँव में
तो उससे क्या?
बलात्कारी आज तक पकड़ा नहीं गया
कौन था वो आपको तो पता होगा?
चोर कभी ख़ुद को चोर कहता है बे?
नहीं साहब, वो चौकीदार बन जाता है
अबे तू ये बता हुआ क्या?
साहब..
पूरे गाँव के सामने ये कांड हुआ
किसी ने देखा?
किसी ने नहीं साहब!
क्यों?
सब अपनी-अपनी बेटियाँ बचा रहे थे
फ़िर ठीक है
उन्होंने भी यही कहा था
किसने बे?
जिन्होंने नारा दिया था..
बिटिया बचाओ बिटिया पढ़ाओ
तो फ़िर करना क्या है?
साहब ये तो आप बताओगे..
आप पत्रकार रहे हो
सुन तू न्यूज चैनल लगा!
कौन सा साहब?
कोई भी..
सब सरकारी हैं
साहब सब कह रहे हैं..
चरित्रहीन थी..
उसका कोई बॉय फ्रेंड था
और बता?
साहब बता रहे कोई दलित थी..
उनके यहाँ तो ये आम है
स्साले मैं भी वहीं से हूँ तू बता!
मैं तो पिछड़ा हूँ साहब
अबे ये नहीं आगे बता पूरी बात
आपको बुरा लगा ना साहब
अबे यही सब लगेगा तो चर्बी कब लगेगी
ये चैनल तो पिछड़ा बता रहा है बे
तो क्या साहब!
मैं पेशेवर हूँ विचलित नहीं होता..
मैंने संविधान की शपथ ली है..
माना वो मेरे गाँव की है..
लेकिन..
इससे मैं कांवड़ ले जाना नहीं छोड़ूंगा..
आपको छुट्टी देनी पड़ेगी
मत छोड़ ये बता कि आरोपी कौन जात धरम से है
नहीं बता सकता साहब
क्यों
लेखक लिखना नहीं चाहता
उसे डर है?
नहीं वो कहता है इससे फर्क़ नहीं पड़ता
अरे सरकार को तो पड़ता है!
क्यों साहब अपराध काफ़ी नहीं?
नहीं वोट ज़्यादा ज़रूरी है
किसके लिये
जिन्हें वोट मिलता है
उन्हें वोट कौन देता है साहब
तुम और मैं..
और हमारे जैसे करोड़ों लोग
पर हम तो वोट सरकार को देते हैं..
बलात्कार को नहीं
लेकिन किस मुद्दे पर?
अरे वही बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ
और कब तक दोगे..
जब तक बेटी बची रहेगी तब तक?
साहब आप मुझे डरा रहे हो..
मुझे तो अब बेटा ही चाहिये
अबे ज़्यादा डर मत
तेरा विकास तो हो रहा है ना?
मैं डरता नहीं साहब..
वो तो सरकार ने बोला है..
अपने लोगों को कहो हम ख़तरे में हैं
अबे तू नहीं वो ख़तरे में हैं..
सचमुच के
सरकार पर तो कोई ख़तरा नहीं साहब
अबे नहीं, जब तक सबसे तेज़ तर्रार लोग..
सरकार के साथ हैं
तो सर बलात्कार का क्या करना है
फाइनल रिपोर्ट लगा
वो जाँच तो हुई नहीं फ़िर कैसे
न्यूज चैनल ने कह दिया, झूठा आरोप है..
बात ख़त्म।

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