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सटायर हिन्दी

विद्रूपताओं का आईना

Poem

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  • यदा यदा हि मर्मस्य….

चुनावी होली !

रंगों की जब छूटी फुहारहम भी हुए तैयारप्रण कर लियानेता को रंग लगाएंगेबिल्ली के गले में घंटी बांधेंगेतभीगुझिया और भांग…